अनुभव के ख़ज़ाने से : - “ संबंध

दोस्तो क्या आप जानते हे जीवन की सच्ची खुशी कीसमे हे ? मेरे अनुभव से कहु तो जीवन की सारी खुशिया हमारे संबंधो की वजह से ही है । ज़रा सोचिए की आपके पास 500 करोड़ की संपत्ति हे गाड़ी , बंगला सबकुछ हे लेकिन आपका परिवार , दोस्त और कोई भी आपके साथ नहीं हे , तो क्या आपको खुशी मिलेगी ? बिलकुल नहीं , लेकिन फिर भी लोग ये सबसे बड़ी संपत्ति को संभालना भुल ही जाते हे । हमारे जीवन का आधार ही हमारे सारे संबंध हे । लेकिन ज़्यादातर लोगो की ज़िंदगी मे संबंधो से जुड़ी समस्याए बहोत ज्यादा होती हे और यही सबसे बड़ी वजह हे जीवन मे खुशियो के अभाव की । सही कहा ना ? लेकिन क्या सच मे हम संबंधो को बिगाड़ना चाहते थे या चाहते हे ? भला जिसकी वजह से जीवन मे खुशिया आती हे कोई उसे बिगाड़ना क्यूँ चाहेगा ? कोई नहीं चाहता लेकिन फिर भी संबंधो मे खट्टापन आ ही जाता हे । ऐसा क्यू ? ये सवाल ने मुजे भी कई सालो तक परेशान किया था । लेकिन एक दिन मुजे ये समज आ गया की इस समस्या की जड़ क्या है , जड़ ये है की “ जीवन का आधार हे संबंध लेकिन ये संबंध का आधार हमने बना दिया हे स्वार्थ या अपेक्षा । ” हम हर संबंधको जाने या अनजानेमे स्वार्थ या अपेक्षा के तराजू से तोलते हे और जब हमारा स्वार्थ या अपेक्षा पूर्ण नहीं होती तब संबंधमे दरार पड जाती हे और फिर वो दोनों ही व्यक्ति के जीवन से खुशिया चली जाती हे । हम माने या ना माने लेकिन हमारा हर संबंध स्वार्थ या अपेक्षा से ही जुड़ा हुवा होता हे । असल मे हर संबंध का आधार होता हे निस्वार्थ प्रेम और करुणा । “ जब कोई भी संबंध निस्वार्थ भाव से और बिना किसी अपेक्षा से जुड़ा हुवा होता हे तो उस संबंध का जोड़ फेविकोल की तरह मजबूत होता हे क्यूंकी इस संबंध का मूल प्रेम होता हे । ” उदाहरन के तौर पे , एक माँ अपने 6 महीने के बच्चे को प्यार करती है ये पूर्णतः निस्वार्थ प्रेम है और इसीलिए उस माँ – बेटे के संबंध मे खट्टापन आ ही नहीं सकता लेकिन जब वो बच्चा 5 साल का होता है , तो इस संबंध के साथ माता की कुछ अपेक्षाए जुड़ जाती है और फिर प्रेम होने के बावजूद भी निस्वार्थ की भावना न होने से कहीं न कहीं इस संबंधमे थोड़ी खटाश आ जाती है । दूसरी समस्या ये है की , लोगो से हमारी अपेक्षाए जाने अनजाने मे जुड़ ही जाती है , लेकिन अगर संबंधो की इस अनमोल संपत्ति को संभालना चाहते हे तो इतना ज़रूर कीजिये ..... “ अपेक्षा पूर्ण हुई तो प्रेम और अपूर्ण हुई तो करुणा , दया ” क्यूंकी किसी भी संबंध का मूल आधार है “ प्रेम और करुणा ” अच्छा लगा तो अपने दोस्तो को Share ज़रूर करे । - आपका दोस्त चिराग उपाध्याय अनुभव के खज़ाने पुस्तक मे से , © चिराग उपाध्याय.