अनुभव के खजाने से : " भावना ( Intention ) "

दोस्तो हमसब जानते ही होंगे की एक दिन मे हमे 60,000 से भी ज्यादा विचार आते है , उसमे से कुछ सकारात्मक और कुछ नकारात्मक । हम ये भी जानते है की , हमे हमेशा सकारात्मक विचार ही करने चाहिये । लेकिन हम हर विचार पर नज़र भी तो नहीं रख सकते तो हम कैसे पता लगाए की ये विचार सकारात्मक है और ये नकारात्मक ? शायद , आप ये भी जानते होंगे की , हम अपनी feelings के जरिये पता लगा सकते है की हमारे मन मे किस प्रकार के विचार चल रहे है । क्योंकि feelings ( अनुभुति ) भी दो प्रकार की होती है , सकारात्मक और नकारात्मक । अगर हमारी feelings सकारात्मक है तो हमारे मन मे विचार सकारात्मक होंगे , और अगर feelings नकारात्मक है तो विचार भी नकारात्मक होंगे । सच कहा ना ? दोस्तो पहेले मै भी यही मानता था लेकिन , धीरे धीरे मुजे ये समज आ गया की सिर्फ feeling अच्छी होने से , विचार भी सकारात्मक होगा ये ज़रूरी नहीं है । उदाहरण के तौर पे , जैसा की हम कोई फिल्म मे देखते है की , एक विलन किसी का बुरा करने का सोच रहा है , ये विचार उसे अच्छी feeling देगा , इसीलिए ये विचार शायद उसके लिए सकारात्मक हो सकता है । लेकिन क्या कुदरत के नियम अनुसार ये विचार सकारात्मक है ? दोस्तो , हमारा विचार सकारात्मक है या नकारात्मक ये हमारी अनुभूति से तेय नहीं होता लेकिन उस विचार के पीछे हमारी " भावना " क्या है , हमारा " Intention " क्या है उससे तेय होता है । एक विलन किसी का बुरा करने की भावना से कुछ सोच रहा है , तो क्या किसी का बुरा करना ये सकारात्मक है ? नहीं ना ? इसी तरह , कई बार विचार नकारात्मक हो लेकिन उसके पीछे की भावना सही हो तो वो विचार नकारात्मक नहीं कहेलाता , जैसे , एक माँ अपने बेटे को डांटने का सोचती है ये विचार गलत है लेकिन उसकी इस डांट के पीछे की भावना गलत नहीं है , याद रखे : “ दुनिया चाहे हमे हमारे विचारो से परखे , ऊपरवाला तो हमे हमारी भावना से ही परखता है । ” इसीलिए लिए विचार नहीं , भावना सही होनी चाहिए । अनुभव के खज़ाने पुस्तक मे से , © चिराग उपाध्याय.