अनुभव के खजाने से :- “ निर्णय ”

दोस्तो हर इंसान के जीवन ऐसा क्षण ज़रूर आता है जब उसे कोई निर्णय करने मे दुविधा हो । आपके जीवन मे कई बार ऐसा वक्त आया होगा जब आपको कोई निर्णय करना था और मन मे दुविधा थी , और शायद भविष्य मे भी ऐसा कोई वक्त आयेगा जब हमे कोई निर्णय करने मे दुविधा महेसुस हो , हम सब के लिए किसी भी महत्वपूर्ण निर्णय का क्षण बड़ा ही कठिन होता है । जब भी हमे कोई निर्णय करना होता हे , उस समय मन मे 1क युद्ध सा हो रहा होता हे की हम जो निर्णय ले रहे हे वो सही हे या नहीं ? इस निर्णय के दूरगामी परिणाम क्या होंगे ? ऐसे कई विचार हमारे मन मे आते हे , लेकिन सवाल ये हे की क्या निर्णय करने का कोई सही तरीका हे ? जी हा दोस्तो एक सही तरीका है । अगर मेरे अनुभव से कहू तो , हमे सिर्फ ये पता लगाना हे की ये निर्णय कहा से जन्मा हे ? इस निर्णय का मूल कहा हे ? कोई भी निर्णय करने से पहेले अपने आप से इतना ज़रूर पूछे की इस निर्णय का मूल स्त्रोत क्या हे ? मेने जो निर्णय किया हे , वो कही “ भय ” से तो नहीं जन्मा ? क्यूकी जीवन के ज़्यादातर महत्वपूर्ण निर्णय “ भय से ” या भविष्य की “ चिंता ” से ही जन्मे होते है लेकिन जो निर्णय भविष्य की चिंता न करते हुवे ( क्योंकि भविष्य की चिंता नहीं , चिंतन करना चाहिए ) “ वर्तमान ” को ध्यान मे रखते हुवे और निर्भय हो कर लिया जाता है , वही निर्णय भविष्यमे सुख का कारण बनता है , क्योंकि किसिने बहोत अच्छा कहा है , वर्तमान की गोद से ही भविष्य का निर्माण होता है । अर्थात जो निर्णय “ निर्भयता ” से जन्मता है वही निर्णय भविष्यमे सुख देता है । अब सवाल ये है की निर्णय की क्षण मे “ निर्भयता ” कैसे मिले ? दोस्तो मैंने ये Personally अनुभव किया है की किसी भी निर्णय मे निर्भयता तभी आती है तब उसका मूल स्त्रोत “ धर्म हो ” । जी हा दोस्तो , हमे सही निर्णय करते समय सिर्फ इतना देखना है की हम जो भी निर्णय करने जा रहे है क्या वो निर्णय धर्म के अनुसार है या उससे विरुद्ध । अगर हमारा निर्णय धर्म के अनुसार है तो फिर वहा भय के लिए कोई स्थान ही नहीं रहेता । बस निर्भयता के साथ उस निर्णय पर डटे रहो , मुजे विश्वास है परिणाम अच्छा ही होगा । अच्छा लगे तो Like और Share ज़रूर करे । ये कॉलम पढ़ने का निर्णय सही लगा ना ? क्यो ? सोचो , ये कॉलम पढ़ने का निर्णय कहा से जन्मा ? शायद आपकी उत्सुकता और ज्ञान प्राप्त करने की भूख से जन्मा है , और इसमे “ भय ” को कोई स्थान नहीं , इसीलिए आपको ये निर्णय सही लगा , है ना ? अच्छा लगे तो Like और Share ज़रूर करे ।.