अनुभव के खजाने से : “ गुरु ”

दोस्तो सबसे पहेले तो आज गुरु पुर्णिमा के दिन आप सबको जीवन का सच्चा ज्ञान मिले ऐसी प्रभु से प्रार्थना। दोस्तो हमारा पूरा जीवन गुरुओ के कारण ही सुखमय बनता । हम जब इस धरती पर जन्म लेते है तब सबसे पहेले हमारी माता हमारी गुरु बनती हे , फिर हमारे पिता हमारे गुरु बनते हे और हमारे पूरे जीवन मे हमे सर्वोच्च ज्ञान हमारे माता-पिता से ही मिलता हे । इसके बाद हम स्कूल या इंस्टीट्यूट के शिक्षको से ज्ञान पाते हे जो हमे हमारा बुद्धि चातुर्य बढ़ाने मे सहायता करते हे । लेकिन मज़े की बात ये हे की हम पढ़ाई पूरी हो जाने के बाद भी हर दिन , हर क्षण कुछ न कुछ नया सीखते रहेते हे । ओर शायद जीवन को सही तरीके से केसे जीना ये महत्व पूर्ण शिक्षा हमे पढ़ाई के बाद हमारे सामाजिक जीवनसे यानि लोगो से ही प्राप्त होती हे । एक ज़रूरी बात “ समय हमारा सबसे बड़ा गुरु है , आज जब मै अपने जीवन को पीछे मुड़कर देखता हु तो पता चलता है की मैंने जीवन मे अबतक जो भी कठिनाइयों का समय देखा वो सारा समय आज बहे गया लेकिन साथ ही साथ वो कठिनाइयों का समय मुजे बहोत कुछ सीखा गया और शायद आज इसी ज्ञान के कारण में अपने आप को सफल देख पा रहा हु । तो मेरे अनुभवों से कहु तो इस दुनिया मे जन्म लेने के बाद , हर क्षण किसी न किसी रूप मे हम गुरु को पाते रहेते हे , कभी कोई बच्चा हमे कुछ सीखा के जाता हे तो कभी कोई बड़ा , कभी हमारे दोस्त हमे सीखा जाते हे तो कभी कुदरत ..... मतलब “ हमारे जीवन मे हमारे गुरु हर क्षण किसी न किसी रूप मे हमारे साथ रहेते हे । ” तो मुजे मेरे अब तक के जीवनपथमे मार्गदर्शन देने वाले और जाने या अनजानेमे बहोत कुछ सीखाने वाले सभी गुरुजनो को मेरे सत सत नमन ... और आप जेसे दोस्त जो मुजे हर वक्त नया नया ज्ञान लेने के लिए उत्सुकता देते हे , जो मेरे सेमिनार और वर्कशॉप को सराहते हे और मेरे दिल मे हर बार नए सेमिनार और नए वर्कशॉप बनाने की चाह पैदा करते हे ऐसे हर दोस्त रूपी गुरुओ को भी मेरा कोटी कोटी नमन । अच्छा लगा तो अपने दोस्तोको Share ज़रूर करे .... - आपका अपना चिराग उपाध्याय “ अनुभव के खज़ाने से ” पुस्तक मे से , © चिराग उपाध्याय

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