अनुभव के खजाने से : - " वक्त "

दोस्तो Time Management ये शब्द बोहोत बार आपने सुना ही होगा और शायद किसी Tool के द्वारा Time को Manage करने की कोशिश भी की होगी , शायद आपने इस टॉपिक को लेकर कोई किताब भी पढ़ी होगी या फिर कोई Session भी Attend किया होगा ...... Am I Right ? or Am I Right ?..... लेकिन सवाल ये हे की , क्या आपको सफलता मिली ? ज़्यादातर लोगो का Answer हे NO ....... उल्टा कई बार ऐसा होता हे की जब सुबह से कोई Schedule बनाया होता हे तो दिन भर ऐसे ऐसे काम आ जाते हे की हमारे Schedule के अनुसार हम चल ही नहीं पाते , और जिस दिन कोई Schedule नहीं बनाया होता उस दिन आराम से काम हो जाते हे !!! तो सवाल ये हे की क्यू ऐसा होता हे ? कई बार हम Schedule को Follow कर लेते हे ओर कई बार नहीं कर पाते ..... ऐसा क्यू ? दोस्तो अपने सुना ही होगा की , “ वक्त कभी किसी के लिए ठहेरता नहीं , वो तो बहेते जरने की तरह हे ” वक्त हमेशा चलता ही रहेता हे , हम उसका इस्तेमाल करे या न करे वो तो बीतता ही जाता हे। इसीलिए एक ही रास्ता है की " हमारी हर क्षणको उपयोगी बनाने के लिए हमे अपने काम को और अपने आप को Manage करना होगा । " हमे असल मे Task Management करना होगा और हमे अपने Emotions को Control मे रखते हुवे अपने Task के प्रति Committed रहेने की आदत डालनी होगी मतलब हमे वक्त को Manage करने का खयाल अपने दिमाग से छोड़ देना चाहिए ओर Time Management की बजाए Self Management और Task Management के ऊपर Focus करना चाहिए । हम वक्त को Manage नहीं कर सकते हे लेकिन अपने आप को ज़रूर Manage कर सकते हे ( अगर करना चाहे तो ) । हमे कोनसा काम पहेले करना हे ओर कोन सा काम बाद मे ये हम खुद ही Decide कर सकते हे । और अपने उस Decision पे कायम रहे सकते हे । लेकिन अगर काम की Priority Decide नहीं की हे तो ये संभव नहीं हे । तो सबसे पहेले Priority Decide करे ओर फिर Commitment के साथ उस काम को करे । - आपका दोस्त चिराग उपाध्याय अच्छा लगा तो अपने दोस्तो को Share ज़रूर करे .... “ अनुभव के खज़ाने से ” पुस्तक मे से , © चिराग उपाध्याय

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