अनुभव के खजाने से : डर : FEAR

दोस्तो हम सबके जीवन मे कभी न कभी समस्या तो आती ही हे । ( शायद अभी चल भी रही हो ) और हम ये भी जानते हे की हर समस्या के साथ उसका समाधान भी आता ही हे , भले ही वो दिखाई न दे । दोस्तो जीवन मे जब भी हम पीछे मुड़कर देखते हे तो हमे पता चलता हे की हम जिस समस्या को बहोत बड़ी मानते थे वो तो बहोत छोटीसी समस्या थी । ( क्योंकि अभी जो हे वो उससे भी बडी हे , हैना ? हा हा हा ... ) , तो अब तक के हमारे जीवन का अनुभव हमे ये कहेता हे की समस्या चाहे कितनी भी बड़ी क्यूँ न हो , आखिर मे तो वो छोटी ही लगती हे , मानते हैना ? तो फिर जीवन मे अनेवाली हर समस्याओ को देखने का , क्यू न एक नया ही द्रष्टिकोण बनाया जाए , और वो हे " हर समस्या को सबसे छोटी समस्या मानना "। यही हे वो “ नया द्रष्टिकोण ” , क्यूंकी हर समस्या अनेवाले कल मे तो छोटी ही लगने वाली हे ( अपने जीवन मे जांख के देखलों ) , तो फिर , अगर पहेले से ही आप इसे छोटी मान लेंगे तो आपका मन शांत हो जाएगा और आप पाएंगे की इस समस्या का समाधान आपके पास पहेले से ही था , ये बात मै अपने अनुभवों से कहे रहा हु । मैंने कई बार ये महेसूस किया है की अगर मै शांत हो जाऊ तो मेरी समस्या का समाधान भीतर से ही मुजे मील जाता है । इसीलीये मै मानता हु की समस्या और समाधान एक साथ ही जन्म लेते है , ज़रूरत है तो बस उसे भीतर खोजने की । और एक बात , हर समस्या हमे कुछ ना कुछ सिखाके भी जाती हे , हैना ? तो हर समस्यासे कुछ न कुछ सीखते रहीये , मेरी तरह इसे अपने अनुभव के ख़ज़ाने मे डालते रहीये और इस बात को हमेशा याद रखे , " जीवन की हर समस्या जब आपको छोटी लगनी लगे तब समजना की आप जीवन को सही मायनों मे समजने लगे है " - चिराग उपाध्याय अच्छा लगा तो अपने दोस्तो को Share ज़रूर करे .... “ अनुभव के खज़ाने से ” पुस्तक मे से , © चिराग उपाध्याय

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