अनुभव के ख़ज़ाने से : - " हार और जीत "

दोस्तो हार और जीत हर इंसान की ज़िंदगी का एक अभिन्न हिस्सा हे । आम तौर पे लोग जीतते हे तो खुश होते हे और हारते हे तो दुखी होते हे । जीवन मे हार मिलने पर ज़्यादातर लोग बोखला जाते है , या अपना आपा खो देते हे , या फिर निराश हो जाते हे । और जीवन मे जीत मिलने पर ज़्यादातर लोग इतने खुश हो जाते हे की उसे संभाल नहीं पाते , उनकी ये खुशी कब अहंकार बन जाती हे पता नहीं चलता । लेकिन कुछ लोगो के लिए हार और जीत दोनों के मायने एक जेसे ही होते हे और ऐसे लोग इतिहास बनाते है । ये लोग मानते हे की , हर हार हमे कुछ सीखा कर जाती हे , एक अनौखा अनुभव देकर जाती हे , हमे अहेसास दिलाती हे की हममे कुछ कमी हे , सुधार करो । और हर जीत हमे ये कहेती हे की बेटा मुजे पाकर चकित मत हो जा , Over Confidence मे मत आजा , वरना इस बार की जीत तेरी आखरी जीत होगी । इसबार की जीत के अनुभव को लेकर आगे बढ़ क्यूंकी तुजमे क्षमता हे और भी बड़ा काम करने की । तो दोस्तो , अगर मेरे अनुभव से कहु तो , महान लोग " हार और जीत " दोनों को ही अपना " अनुभव " मानते हे , दोनों ही उनके लिए समान होते हे और इसीलिए ऐसे लोग हार कर भी बाज़ी को जीत लेते हे , तभी तो हम उन्हे बाज़ीगर कहेते हे । तो आज से हार मिले या जीत उसे अपने अनुभव के ख़ज़ाने मे डालने की आदत डालो , और ज़िंदगी को मज़े से जीओ । अच्छा लगा तो ज़रूर Share करे । - आपका दोस्त चिराग उपाध्याय “ अनुभव के खज़ाने से ” पुस्तक मे से , © चिराग उपाध्याय.